भारतीय लोक दृष्टि में विश्वशांति( एक दिवसीय व्याख्यान) New

दिनांक 06.03. 2026 को डी बी एस महाविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग द्वारा भारतीय लोक दृष्टि में विश्वशांति विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया I महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अनिल कुमार मिश्रा ने मुख्य अतिथि का स्वागत एवं विषय प्रवर्तन करते हुए वैश्विक शांति हेतु भारतीय दार्शनिक-सांस्कृतिक दृष्टि की चर्चा की एवं दुनिया को उसकी तरफ लौटने की जरूरत बताई I कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पधारे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के प्रोफेसर आर एन त्रिपाठी ने बताया कि भारत मानवीय मूल्य व प्रेम में विश्वास करने वाला देश है I आज जब वैश्वीकरण की विदाई हो रही है तथा वह उपनिवेशवाद वापस आ रहा है उसे स्थिति में भी भारत विश्व कल्याण की बात कर रहा है I यह बुद्ध और कृष्ण की धरती है जो हमें सिखाती है कि जो कार्य आपको अपने लिए अच्छे ना लगता हो वह दूसरों के साथ नहीं करना चाहिए यही भारतीय सोच है भारत का दर्शन अहम का दर्शन नहीं बल्कि वयम का दर्शन है I जो न केवल मानव की बल्कि इस संपूर्ण विश्व में सभी जीवधारियों तथा प्रकृति की चिंता करता है I भारतीय दर्शन प्राचीन काल से ही सस्टेनेबल डेवलपमेंट की बात करता रहा है I जहां सभी लोग सुखी व निरोग रहे I उन्होंने बताया कि हमारे लोकोपयोगी बनने से ही विश्व का कल्याण संभव है I उन्होंने साधु की परिभाषा बताते हुए कहा कि सच्चा साधु वही है जिसने दुखियों को अपनाया है उनकी चिंता की है उनकी सेवा की है I कार्यक्रम में बोलते हुए प्रो के के श्रीवास्तव ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारतीय लोक दृष्टि की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।कार्यक्रम के अंत में समाजशास्त्र विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया I इस अवसर पर विभाग के डॉ जगदीप दिवाकर, डॉ प्रतिभा सिंह, डॉ गौरव सिंह, डॉ संतोष यादव एव छात्र/छात्राएं उपस्थित रहे।

 

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