दिनांक 14:10 2025 को संस्कृत विभाग द्वारा “भारतीय संस्कृति में षोडश संस्कार विषय पर परिचर्चा” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आरम्भ एम० ए ० प्रथम सेमेस्टर की छात्रा दीपा विश्वकर्मा द्वारा सरस्वती वन्दना के साथ प्रारम्भ हुआ। उक्त कार्यक्रम में विभाग प्रभारी प्रो० प्रीति राठौर ने कहा कि संस्कारों का उद्देश्य व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास को पूर्णता प्रदान करना है। भारतीय संस्कृति में 16 संस्कारों की एक पारंपरिक सूची है जो जन्म से लेकर मृत्यु तक जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों को चिन्हित करती है. इस तथ्य को उद्घाटित करते हुये इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ० सुमिलानन्दन श्रीवास्तव जी ने अपने वक्तव्य में कहा । कार्यक्रम का संचालन विभाग की एसो० प्रो० डॉ० प्रत्यूष वत्सला द्विवेदी ने किया। उन्होंने कहा- ये संस्कार इस जीवन में ही मनुष्य को पवित्र नहीं करते है अपितु पारलौकिक जीवन को भी पवित्र बनाते हैं। कार्यक्रम में संस्कृत विषय के छात्र छात्रायें जिनमें महालक्ष्मी शुक्ला , हर्षित अवस्थी, दीपा विश्वकर्मा, आरती गुप्ता, आर्यवीर सिंह, रोशनी पाल, नेहा मौर्या आदि ने भी अपने विचार प्रस्तुत किये।


